जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ बना सुशासन का सशक्त मॉडल: 408 शिविरों में 3.30 लाख से अधिक नागरिकों की भागीदारी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में अभियान से सरकार–जनता के बीच सीधा संवाद, हजारों शिकायतों का त्वरित समाधान

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल, संवेदनशील और परिणामोन्मुख नेतृत्व में उत्तराखण्ड सरकार द्वारा संचालित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम प्रदेश में सुशासन, त्वरित सेवा-प्रदान और जनसमस्याओं के समाधान का एक प्रभावी मॉडल बनकर सामने आया है। यह अभियान सरकार और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित कर शासन को वास्तविक रूप से जन-केन्द्रित बना रहा है।
अब तक राज्य के सभी 13 जनपदों में 408 जनसेवा शिविरों का आयोजन किया जा चुका है। केवल आज के दिन ही 13 नए शिविरों का आयोजन कर सरकार ने अपनी सक्रियता और प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ किया है। इन शिविरों में अब तक 3,30,461 नागरिकों ने सहभागिता की है, जिनमें से 7,876 नागरिकों ने आज प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया।
अभियान के अंतर्गत अब तक 33,529 शिकायत एवं प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 22,675 मामलों का सफल निस्तारण किया जा चुका है। केवल आज ही 783 नए प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 502 मामलों का समाधान मौके पर अथवा संबंधित विभागों के माध्यम से सुनिश्चित किया गया।
इसके साथ ही विभिन्न प्रमाण-पत्रों एवं अन्य शासकीय सेवाओं के लिए कुल 43,975 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें आज 659 नए आवेदन शामिल हैं। राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से अब तक 1,79,169 नागरिकों को प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित किया जा चुका है, जिनमें 3,911 नए लाभार्थी आज जुड़े।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी का मानना है कि जब सरकार स्वयं जनता के पास जाकर उनकी समस्याएं सुनती है और समाधान करती है, तो शासन के प्रति विश्वास स्वतः मजबूत होता है। यह अभियान उत्तराखण्ड में सुशासन की एक नई कार्यसंस्कृति स्थापित कर रहा है, जहां संवाद, समाधान और सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में यह कार्यक्रम आने वाले समय में और अधिक व्यापक रूप में जारी रहेगा तथा उत्तराखण्ड को जनकल्याण और सुशासन के क्षेत्र में एक आदर्श राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।



