उत्तराखंड

उत्तराखण्ड में आपदा प्रबंधन को हाईटेक बनाने पर जोर, शीतलहर पूर्व तैयारी कार्यशाला का मुख्यमंत्री ने किया शुभारंभ

ड्रोन, सैटेलाइट और अर्ली वार्निंग सिस्टम से आपदा जोखिम न्यूनीकरण को मिल रही नई मजबूती

देहरादून। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश में आपदा जोखिम न्यूनीकरण को एक प्रमुख राष्ट्रीय एजेंडा बनाया गया है। उन्हीं के मार्गदर्शन में उत्तराखण्ड सरकार भी आपदा प्रबंधन को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री शुक्रवार को सर्वे ऑफ इंडिया ऑडिटोरियम, हाथीबड़कला में आयोजित ‘शीतलहर पूर्व तैयारी’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ करने के बाद उपस्थित अधिकारियों एवं विशेषज्ञों को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि राज्य में ड्रोन सर्विलांस, जीआईएस मैपिंग, सैटेलाइट मॉनिटरिंग और अर्ली वार्निंग सिस्टम को सुदृढ़ किया जा रहा है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेंसर स्थापित करने, डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम तथा आधुनिक रैपिड रिस्पॉन्स टीमों के गठन जैसे कदम उठाकर आपदा जोखिम को कम किया जा रहा है।

हिमस्खलन संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षित पर्यटन सर्वोच्च प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे हिमालयी राज्य में हिमस्खलन (एवलांच) एक गंभीर प्राकृतिक खतरा है। कई क्षेत्र अत्यधिक संवेदनशील हैं, जहां पर्यटन, तीर्थाटन और पर्वतारोहण गतिविधियों को सुरक्षित बनाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए पूर्व चेतावनी तंत्र को मजबूत किया जा रहा है, प्रशिक्षित रेस्क्यू बलों की तैनाती की जा रही है और सुरक्षित पर्यटन प्रोटोकॉल को और प्रभावी बनाया जा रहा है।

शीतलहर और हिमपात से निपटने के लिए ठोस इंतजाम

मुख्यमंत्री ने बताया कि शीतलहर और अत्यधिक हिमपात से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के लिए राज्य में ठोस और व्यावहारिक कदम उठाए गए हैं। सभी जिलों को अर्ली वार्निंग सिस्टम से जोड़ा गया है। जिलाधिकारियों को अलाव, रैन बसेरों और कंबलों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने मौसम विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय पर जोर देते हुए कहा कि समय पर चेतावनी और आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।

स्वास्थ्य सेवाओं को अलर्ट मोड पर रखने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने कहा कि शीतलहर के दौरान हाइपोथर्मिया, जुकाम, फ्लू और निमोनिया जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने के लिए सभी जिला अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और मोबाइल मेडिकल टीमों को पूरी तरह सक्रिय रखा जाए। सीमांत और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में आवश्यक दवाइयों, हीटिंग उपकरणों और प्राथमिक उपचार सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

युवा आपदा मित्र और आपदा सखी को मिलेगा और सशक्त रूप

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए ‘युवा आपदा मित्र’ और ‘आपदा सखी’ जैसी पहलों को और अधिक सशक्त बना रही है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस कार्यशाला के माध्यम से शीत ऋतु के दौरान संभावित आपदाओं से निपटने की तैयारियों की समीक्षा होगी और विभागों के बीच समन्वय मजबूत होगा।

कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण विमोचन

कार्यशाला के दौरान मुख्यमंत्री ने शीतलहर, बाढ़, मॉक ड्रिल, हवाई यातायात सहायता की एसओपी, आपदा प्रबंधन विभाग के नव वर्ष कैलेंडर 2026 तथा आपदा प्रबंधन हस्तपुस्तिका का विमोचन किया। वर्ष 2025 में आपदा के दौरान राहत एवं बचाव कार्य में सराहनीय योगदान देने वाले लोगों और युवा आपदा मित्रों को सम्मानित भी किया गया। इसके अलावा, आपदा प्रबंधन के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया द्वारा उपलब्ध कराए गए चार वाहनों को मुख्यमंत्री ने फ्लैग ऑफ किया।

मुख्य सचिव का बयान

मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य में आपदा प्रबंधन को सशक्त, संगठित और नीति आधारित स्वरूप दिया जा रहा है। यह कार्यशाला राज्य की आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में एक सराहनीय पहल है।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य श्री राजेन्द्र सिंह, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष श्री विनय रूहेला, सचिव आपदा प्रबंधन श्री विनोद कुमार सुमन सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button