उत्तराखंड

‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ कार्यक्रम को ग्रामीणों ने बताया बेहतर पहल

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर न्याय पंचायत स्तर पर हो रहे कार्यक्रमों से गांवों में मिल रहा त्वरित समाधान

देहरादून।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार प्रदेशभर में न्याय पंचायत स्तर पर आयोजित किए जा रहे “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रमों को ग्रामीणों ने प्रशासन और जनता के बीच सेतु बताकर इसकी सराहना की है। ग्रामीणों का कहना है कि इस पहल से अब उन्हें अपनी समस्याओं के समाधान के लिए जिला या तहसील स्तर के कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से पेयजल, सड़क, बिजली, आवास, पेंशन, राशन कार्ड, स्वास्थ्य एवं राजस्व से संबंधित समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया जा रहा है। अधिकारियों की सीधी मौजूदगी के कारण शिकायतों का तत्काल पंजीकरण और निस्तारण संभव हो पा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि पहली बार प्रशासन सीधे गांव तक पहुँचकर समस्याएं सुन रहा है, जिससे शासन-प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ा है। कई मामलों में वर्षों से लंबित शिकायतों का समाधान भी इन शिविरों के माध्यम से हुआ है।

कार्यक्रम में विभागीय अधिकारियों द्वारा विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दी जा रही है, जिससे पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ मिल रहा है। महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों के लिए यह पहल विशेष रूप से सहायक सिद्ध हो रही है।

मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा है कि राज्य सरकार का उद्देश्य सुशासन को अंतिम छोर तक पहुँचाना है और “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम इसी दिशा में एक प्रभावी प्रयास है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जनता से जुड़ी हर समस्या को संवेदनशीलता और प्राथमिकता के साथ हल किया जाए।

ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री की इस पहल के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम सरकार को सच मायनों में जनता के द्वार तक लाने वाला साबित हो रहा है।

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