उत्तराखंड

ऊर्जा क्षेत्र में आपदा प्रबंधन को लेकर राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस कॉन्क्लेव में विशेष सत्र

विशेषज्ञ बोले—संकट के समय सटीक सूचना और मजबूत जनसंपर्क से ही बनता है भरोसा

राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस के अवसर पर आयोजित कॉन्क्लेव में ऊर्जा क्षेत्र में आपदा प्रबंधन और जनसंपर्क की भूमिका पर केंद्रित एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र में विभिन्न विशेषज्ञों, संचार रणनीतिकारों और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों ने भाग लेकर अपने अनुभव साझा किए।

सत्र में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि आपदा के समय सूचना का सही और त्वरित प्रसार अत्यंत आवश्यक होता है। ऊर्जा क्षेत्र में किसी भी प्रकार की आपात स्थिति—जैसे बिजली आपूर्ति में बाधा, तकनीकी विफलता या प्राकृतिक आपदा—के दौरान प्रभावी जनसंपर्क व्यवस्था स्थिति को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

वक्ताओं ने कहा कि जनसंपर्क केवल सूचना देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जनता के बीच विश्वास कायम रखने का माध्यम भी है। पारदर्शिता, जवाबदेही और निरंतर संवाद के जरिए संकट की स्थिति में भी संस्थानों की विश्वसनीयता बनी रहती है।

इसके साथ ही डिजिटल और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि इन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से तेजी से सूचना पहुंचाई जा सकती है, लेकिन फर्जी खबरों और अफवाहों को रोकने के लिए सतर्क रणनीति अपनाना जरूरी है।

सत्र में विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से यह समझाया गया कि बेहतर संचार प्रबंधन से आपदा के प्रभाव को कम किया जा सकता है और पुनर्वास कार्यों को भी गति मिलती है।

कॉन्क्लेव के इस सत्र ने यह स्पष्ट किया कि ऊर्जा क्षेत्र में आपदा प्रबंधन को मजबूत बनाने के लिए जनसंपर्क को एक रणनीतिक स्तंभ के रूप में विकसित करना समय की आवश्यकता है।

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