गणतंत्र दिवस केवल तिथि नहीं, संविधान के संकल्प का प्रतीक है: मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन
सचिवालय परिसर में ध्वजारोहण कर मुख्य सचिव ने अधिकारियों-कर्मचारियों को दी गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएँ

देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर सचिवालय परिसर में ध्वजारोहण कर प्रदेशवासियों एवं सचिवालय में उपस्थित अधिकारियों-कर्मचारियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएँ दीं।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस केवल एक औपचारिक तिथि नहीं है, बल्कि उस महान संकल्प, संघर्ष और दूरदृष्टि का प्रतीक है, जिसके बल पर भारत ने स्वयं को एक सम्प्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में स्थापित किया।
मुख्य सचिव ने कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर के नेतृत्व में निर्मित भारतीय संविधान हमें न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्यों से जोड़ता है। संविधान ने जहां हमें अधिकार दिए हैं, वहीं हमारे कर्तव्यों का बोध भी कराया है।
उन्होंने अधिकारियों-कर्मचारियों से कहा कि हमें यह स्मरण रखना चाहिए कि हम केवल शासकीय कार्य नहीं कर रहे, बल्कि जनता के सेवक हैं। हमारी प्रत्येक फाइल, नीति और निर्णय किसी न किसी रूप में नागरिकों के जीवन को प्रभावित करता है। इसलिए प्रशासन में संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही को व्यवहार में उतारना आवश्यक है।
मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि यह संघर्ष, त्याग और सपनों की उपज है। राज्य निर्माण के आंदोलन में माताओं, युवाओं और समाज के हर वर्ग के योगदान को स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि यह राज्य उन बलिदानों का परिणाम है, जिनकी नींव पर आज का उत्तराखण्ड खड़ा है।
उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण के 25 वर्ष पूर्ण कर चुके उत्तराखण्ड के लिए वर्ष 2026 अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह रजत जयंती के बाद का नवोन्मेषी चरण है, जहां अतीत से सीख लेकर भविष्य की नींव को और अधिक मजबूत बनाना है। सचिवालय को उन्होंने राज्य की नीतिगत धड़कन बताया, जहां से योजनाओं का जन्म होता है और शासन का संदेश अंतिम व्यक्ति तक पहुँचता है।
मुख्य सचिव ने कहा कि आज का युग केवल योजनाओं की घोषणा का नहीं, बल्कि परिणामों का युग है। नागरिक यह जानना चाहते हैं कि योजनाओं से उनके जीवन में क्या वास्तविक परिवर्तन आया है।
उन्होंने बताया कि उत्तराखण्ड शासन ने हाल के वर्षों में ई-गवर्नेंस, डिजिटल सेवाओं के विस्तार, पारदर्शी भर्ती प्रक्रियाओं, समयबद्ध सेवा वितरण और प्रशासनिक सुधारों की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। सचिवालय का प्रत्येक अधिकारी-कर्मचारी इस प्रशासनिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग है।
मुख्य सचिव ने कहा कि भारत आज विश्व का सबसे युवा देश है और उत्तराखण्ड भी इस युवा ऊर्जा से परिपूर्ण है। Artificial Intelligence, Data Analytics और Online Platforms शासन को अधिक तेज, सटीक और पारदर्शी बना रहे हैं। विकसित भारत @2047 का संकल्प केंद्र ही नहीं, बल्कि हर राज्य और हर कर्मचारी का साझा दायित्व है।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने गणतंत्र दिवस पर यह संकल्प लेने का आह्वान किया कि सभी संविधान की मर्यादा बनाए रखते हुए जनसेवा को सर्वोच्च कर्तव्य मानेंगे और उत्तराखण्ड को एक आदर्श राज्य बनाने में पूर्ण योगदान देंगे।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव श्री आर.के. सुधांशु, श्री एल. फैनई, श्री आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिवगण, अपर सचिवगण, सचिवालय के अधिकारी-कर्मचारी एवं उनके परिजन उपस्थित रहे।


